अभी हाल ही बिजनेस स्टैंडर्ड की पत्रकार निरुपमा पाठक की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई... इस मौत पर लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाए। कोई कहता है कि निरुपमा की मां ने ...तो कोई कहता है कि उसने आत्महत्या की...पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि उसकी हत्या की गई लेकिन सच क्या है कोई नहीं जानता... प्रश्न ये उठता है कि अपने बच्चों को लाडप्यार से पालने वाले मां बाप को उनसे बहुत उम्मीदें होती है। निरुपमा ने उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास भी किया था। लेकिन निरु की एक छोटी सी भूल ने उसे रातों रात सारी मीडिया में और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया। निरु की हत्या क्यों की गई। उसने गैर जाति के लड़के के साथ शादी करने जा रही थी...या कुछ जो उसके ....क्या निरु के जाति का लड़का होता और स्थिती ऐसी होती तो क्या निरु के माता पिता बर्दाश्त कर पाते। इसपर एक प्रश्न ये उठता है कि क्या अगर निरु का भाई ऐसा काम करता। तो क्या उसके मां-बाप उसके साथ भी वैसा ही व्यवहार करते जो निरु के साथ किये। शायद नहीं...क्योंकि तब उनके विचार बदल जाते। क्योंकि बेटा बेटा होता है... वो मां-बाप को मुखाग्नि देता है। लेकिन ऐसा कब तक होता रहेगा... कब तक हरबार निरु को ही सजा देने वाली भी निरु ही थी फर्क सिर्फ इतना था कि एक मां थी दूसरी बेटी... आज का समाज इतना बदल चुका है हर स्त्री को वो सीता के रुप में देखना चाहता है। लेकिन वो राम को हर समय मर्यादा पुरुषोत्तम के रुप में ही मानता है। जबकी राम ने जो सुपर्नखा के साथ लक्ष्मण के साथ मिलकर किया वो सबको पता है।
क्या निरु अपनी शादी करने के बाद अपने मां बाप के पास जाती तो क्या उस समय भी उसके साथ वही करते जो अभी हुआ।
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